देखा है हमने
अपनों को खोने का खौफ़ देखा है हमने
चारदीवारी में कैद कर खुद से झगड़ते देखा है हमने
एक वक्त की रोटी के खातिर आपस में लड़ते देखा है हमने
उस युग के हैं हम, जहाँ यह मंज़र खुली आँखों से देखा है हमने
शहरों को शमशान में तब्दील होते देखा है हमने
अपनों को बचाने की होड़ में गिड़गिड़ाते देखा है हमने
घरों के चिरागों को अकस्मात बुझते हुए देखा है हमने
उस युग के हैं हम, जहाँ यह मंज़र खुली आँखों से देखा है हमने
पृथ्वी को अपने पर हुए अत्याचार का बदला लेते देखा है हमने
घमासान युद्ध को बिना बारूद के जीत के देखा है हमने
अमीरों को भी अपनी हैसियत का पता चलते देखा है हमने
उस युग के हैं हम, जहाँ यह मंज़र खुली आँखों से देखा है हमने
जिंदगी के असल नायकों को देखा है हमने
अपनी जान की परवाह किए बिना औरों को नव जीवन देने की चेष्टा को देखा है हमने
एकता में अनेकता का अविश्वसनीय उदाहरण देखा है हमने
उस युग के हैं हम, जहाँ यह मंज़र खुली आँखों से देखा है हमने
一भूमि सिंह

Too good 🙌
ReplyDelete🫡❤️
Delete