परिंदा
उड़ जा परिंदे, उड़ना है तुझको
खुद के लिए लिए जीना है तुझको
आएँगी कठिनाईयाँ, विचलित करेंगी तुझको
खुद के लिए लिए जीना है तुझको
आएँगी कठिनाईयाँ, विचलित करेंगी तुझको
लक्ष्य को पाना है तुझको,
उड़ जा परिंदे उड़ना है तुझको ||
एक बार पंख फैलाकर तो देख,
मंजिले खुद रास्ता दिखाने लगती हैं,
एक बार पंख फैलाकर तो देख,
एक बार उड़ने का जज्बा बनाकर तो देख,
कठिनाइयाँ सलाम करने लगती हैं,मंजिले खुद रास्ता दिखाने लगती हैं,
एक बार पंख फैलाकर तो देख,
उड़ना है तुझको, उड़कर तो देख ॥
—भूमि सिंह

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